| Bhare hue jaam par surahi ka sar jhuka toh bura lagega jise teri aarzoo nahin tu usey mila toh bura lagega .! Ye aisa rasta hai jis pe har koi barha laḍkhaḍa raha hai Main khush hoon us ke nikaalne par aur itna aage nikal chuka hoon Ye aaḳhiri kannpkanpata jumla ki is taAlluq ko ḳhatm kar do Na jaane kitne ġhamon ko peene ke baad tabish chaḍhi udasi |
भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा।
ये ऐसा रस्ता है जिस पे हर कोई बारहा लड़खड़ा रहा है
मैं पहली ठोकर के बाद ही गर सँभल गया तो बुरा लगेगा।
मैं ख़ुश हूँ उस के निकालने पर और इतना आगे निकल चुका हूँ
के अब अचानक से उस ने वापस बुला लिया तो बुरा लगेगा।
ये आख़िरी कंपकंंपाता जुमला कि इस तअल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा।
न जाने कितने ग़मों को पीने के बा’द ताबिश चढ़ी उदासी
किसी ने ऐसे में आ के हम को हँसा दिया तो बुरा लगेगा।।